मंगलाचरण
मंगलाचरण........
हे समरथ परमात्मा, हे निर्गुण निरंकार|
तू कर्ता है जगत का, तू सबका आधार |
कण-कण में है बस रहा, तेरा रूप अपार ।
तीन काल है सत्य तू, मिथ्या है संसार ।
घट-घट वासी हे प्रभु, अविनाशी करतार ।
दया से तेरी हों सभी, भव-सागर से पार ।
निराकार साकार तू, जग के पालनहार ।
है बेअन्त महिमा तेरी, दाता अपरम्पार ।
परम पिता परमात्मा, सब तेरी सन्तान ।
भला करो सबका प्रभु, सबका हो कल्याण ।
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| धन निरंकार... |

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